शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

मै तुम्हे आत्मा के तीन प्रकार बताता हूँ ; किस प्रकार यह आत्मा ऊंट बनती है और ऊंट से सिह बनती है और सिंह से शिशु।
बड़े बड़े भीष्म भर जेलने है इस आत्मा को - उस बलवान आत्मा से जो भर सह सकती हओ ,और जिसके भीतर श्रधा और निष्ट हो । उसका बल चाहता है की उस पर अधिक अधिक बोजिल भर लड़ा जऐ ।
बोज़ होता क्या है? यहं लड्डू आत्मा पuchati है :मुजे भी बताओ ताकि मै भी आपने पीट पर लाअड़ लू और गर्वे महसूस करू ।
नीत्शे कहते है की " यह विरत अजगर है क्या जिसे आत्मा अब आपना स्वामी और आपना भगवन मानाने से इंकार करती है ? यह विरत अजगर का नाम हैयह तेरा कर्त्तव्य है'किन्तु सिंह आत्मा कहती है - ' त्यह मेरा कर्त्तव्य है ।' लेकिन आज अजगरो की संख्या बड़ी है और सिंहो का नामोनिशान तक यहाँ नहीं है ,इसीliye अगर agar jina hai to sinh bano na ki unt lekin uskesath use ek shisu ki tarah bhi rahna padega jo naya aarambha hai
तो इस प्रकार इन्सान ko अब ऊंट, सिंह ,और शिशु इस तीन आवस्थाओ में से गुजरना पड़ेगा जिस आप जीवन कहते है ,लेकिन नीत्शे इसे लघुमानव का जीवन कहता है । और महामानव बनाने की ओर खोज मै हमारी मदद करता है ।
जीवन मै हम हर बार सीधे मरत्यु से ladte है । दुश्मन तो हमारा इस दुनिया मै कोई नहीं है लेकिन म्रत्यु को महबूबा kahnewale भी इस दुनिया मै है क्या lagata है की
unhe mout का dar नहीं lagata ,dar तो है bus dil से khounf nikal diya है ।
kisi को यह huk नहीं है की vah dusare को aapane kartavyo के bare मै aagah kare q की आज yahi sare sangharsho की jad ban baita है ।
prashashan को aaina dikhana aacha नहीं lagata hai thik vahi stiti आज इस awam की है इसे भी kartavyo के bare मै aagah kare यह bat नहीं utarti है ।
kartavyo को jawabdeh banan कोई बड़ी bat तो नहीं है पर kriyashilta के kami की wajah से यह manwana sabase katin karya है ।
logo की mansikta को in banto को jootana hoga जिस से manushya का जीवन सफल rahega .
nahi to phir koi bhagwan paida hoga
phir koi dharm banaya jayega
phir koi jarthrushtra paida hoga aapni nayi sankalpana के sath जिसे phir यह दुनिया nakar degi kahegi नहीं chahia hame यह महामानव की diksha hame do tum लघुमानव ................................................................................ जो sahaj hai